दिल-ऐ-थकन 3



दिल की हर धड़कन थी 36 मील में,

वो मेरे दिल में और मै उसके दिमाग़ में!


उसकी नापाक-ऐ-मोहब्बत की क़ीमत कैसे दूँ,

दिल को तोला नाक की इक कील में!


कुछ कहो या ना कहो एज़ाज़,

उसकी सारा नशा था सैण्डिल की हील में!


यार कहकर मेरी सिगरेट खेंच ली 

किस क़दर बिगड़ैल थी प्यार की तामिल मे!


यक-ब-यक दिलो में सुनामी सी आ गई,

जब वो धोका दिया इस दिसंबर के महफिल मे!


उम्र अदाकारी में सारी कट गई,

इक झूठे प्यार की तावील में!


सैकड़ों ग़ज़लें मुकम्मल हो गईं,

दो अधूरे प्यार की तकमील में!...

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