तुम्हारी प्यार था झूठा कभी दिल को आराम ना दे सका,
मेरे दिल की बाग़ खिल तो गया पर खिल के मुस्कुरा न सका,
मेरी दिल को तबाह कर के रहम खा न सकी
जो आश थी रोशनी की दिल मे, वो रोशनी को पा न सका,
न जाने वो तड़प मेरे दिल कि मुझपे क्या गुज़री,
जो गम दिल से आँख तक आया वो कभी गिर ना सका,
क्या करेंगे फिर एक बार प्यार कर के,
जो अपनी सच्चे प्यार को कभी पा न सका,


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