मुझपे मौला करम की नज़र कीजिए।
अब दुवाओं मे कुछ तो असर कीजिए।।
मैं हकीकत में कितना गुनहगार हूँ।
मुझपे नज़रे इनायत मगर कीजिए।।
अब इधर कीजिए या उधर कीजिए।
तेरा बंदा हूँ चाहे जिधर कीजिए।।
आसरा है फक़त तेरा ही बस मुझे।
रहम कुछ तो मेरे हाल पर कीजिए।।
रात ग़म की अंधेरी ये कटती नहीं।
जल्द इसकी ख़ुदाया हल कीजिए।।
अब इधर कीजिए या उधर कीजिए।
तेरा बंदा हूँ चाहे जिधर कीजिए।।
अर्ज इतनी है या रब मुझे बख्श दीजिए ।
जब मरूँ ज़न्नत में मेरा घर कीजिए।।
मै "एज़ाज़" इस जहाँ का पर गुनाहगार हूँ बहूत।
आगे आसान मौला सफ़र कीजिए।।
अब इधर कीजिए या उधर कीजिए।
तेरा बंदा हूँ चाहे जिधर कीजिए।।


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