जब तबीयत लगे भारी, तो हमें काॅल करो
हो उदासी कभी तुम्हारी , तो हमें काॅल करो
तुम्हारे पास है मौजूद हमारा नम्बर
याद आए जो हमारी,तो हमें काॅल करो
हो सफ़र का जो इरादा , कहीं जाना हो तुम्हें
न मिले कोई सवारी , तो हमें काॅल करो
दिल का दरिया जो कभी ग़म का उठाए तूफान
अश्क आंखों से हो जारी , तो हमें काॅल करो
फेर लें सारे नज़र वक़्ते मुसीबत, जिस दम
काम कुछ आए न रिस्तेदारी, तो हमें काॅल करो
हम तो हैं ना , तेरे ग़म ख़्वार , तेरे चारा गर
छोड़ दे दुनिया जो सारी, तो हमें काॅल करो
आसमां पर हो घटा छाई , रहे तन्हाई
और हवा में हो ख़ुमारी,तो हमें काॅल करो
चाँदनी जिस्म जलाए, जो सताए ख़लवत
रात जाए न गुज़ारी , तो हमें काॅल करों
काश हम से भी कभी कोई "एजाज" ये कहता
कुछ ज़रूरत हो तुम्हारी, तो हमें काॅल करों
अल्फाज़-ऐ-एजाज
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