तेरी यादो को दफ़नाने लगा हूं
मैं खुद को छोड़कर जाने लगा हूं
ख़तम हो जाऊगा दो चार दिन मे
मैं खुद को नोच कर खाने लगा हूं
मुझे जिस से मुहब्बत थी उसी पे
न जाने क्यूँ मैं चिल्लाने लगा हूं
मेरी सुनता नही है अब मेरा दिल
इसे हर वक्त धमकाने लगा हूं
मुझे शायद खुशी की आरज़ू है
किसी के गम से घबराने लगा हूं
लबो पे आ रहा है नाम किसका
कई दिन मे जो हकलाने लगा हूं
तेरे गांव से यूँ ही दूर हूं मैं
तेरी गलियो से क़तराने लगा हूं
विसाले यार के किस्से सुनाकर
अब अपने दिल को बहलाने लगा हूं
कोई इनमे तुझे पहचान ना ले
हरिक मिसरे को उलझाने लगा हूं
कोई दूजा मुझे अपना रहा है
तेरे हाथो से मैं जाने लगा हूं
उठायी खुद ही मैने खूद की मय्यत
मैं खुद ही खुद के सिरहाने लगा हू
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