"एज़ाज़" अब कोई सौदा कोई जुनूँ भी नहीं,
मगर तकलीफ से दिन काट रहे हों ये सही भी नहीं,
अल्फाज़-ऐ-सुखन भी मिला गुफ़्तगू का फ़न भी मिला,
मगर जो दिल पे गुज़रती है वो बात कह सकूँ भी नहीं,
"एज़ाज़" उसकी यादो की थकन से खामोश ना हो,
जो तू कहे तो उसे उम्र भर सोचु भी नहीं,
"एज़ाज़" जैसे कोई दिया तुर्बत-ए-हवा चाहे है
वो पास आये तो मुमकिन है तू रहे भी नहीं,

Nice
ReplyDeleteसुक्रिया दोस्त
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