सच्चे दिल थी वो, तो क्यूँ गिला मुझको किया...?
जब के ख़ुद प्यार को नफरत, नफरत को प्यार मैंने किया,
कैसे नासमझ लफ़्ज़ों की कहानी थी वो लड़की,
उस को कितनी मुश्क़िलों से तर्जुमा मैंने किया,
वो मेरी पहली मोहब्बत ,वो मेरी पहली शिकस्त,
फिर तो पैमान-ए-वफ़ा सौ मर्तबा मैंने किया,
मिली है सजा प्यार मे मुझे मुक़द्दर में मेरे
अपनी जान-ए-जहां की ख़ुशी के लिए मैंने क्या नहीं किया,
वो ठहरती क्या, की गुजारा तक नहीं मेरे लिए,
घर तो घर हर रास्ता आरास्ता मैंने किया,
मुझ पे अपना जुर्म साबित हो ना हो लेकिन "एज़ाज़"
लोग कहते हैं के उस को बेवफ़ा मैंने किया...

Comments
Post a Comment
अपने बहुमूल्य विचार हमसे साझा करें। ...