सच्चे या झूठे रिस्तो से डरता नहीं हूँ मै,
बिल्कुल तुम्हारी सोच के जैसा ही हूँ मैं,
जिनको आसानी से मिल जाता हूँ मैं,
वो समझते है बहुत सस्ता हूँ मैं,
जा नदी से पूँछ शैराबी मेरी,
किस घड़े ने कह दिया प्यासा हूँ मैं,
मेरी ख्वाहिश है कि दरवाजा खुले,
वरना खिड़की से भी आ सकता हूँ मैं,
दूसरे तो सिर्फ तोड़ सकते है मुझे,
वरना सिर्फ अपनी चाबी से खुलता हूँ मैं,

Comments
Post a Comment
अपने बहुमूल्य विचार हमसे साझा करें। ...