कुछ न किसी से बोलेंगे...



कुछ न किसी से बोलेंगे

तन्हाई में रो लेंगे


हम बेरहबरों का क्या

साथ किसी के हो लेंगे


ख़ुद तो हुए रुसवा लेकिन

तेरे भेद न खोलेंगे


जीवन ज़हर भरा साग़र

कब तक अमृत घोलेंगे


नींद तो क्या आयेगी "एज़ाज़ "

मौत आई तो सो लेंगे...

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