नफरत भरी आंखों से आंखें तो मिलाते जाइये,
नफरत मे करना है क्या ये तो बताते जाइये,
बन के खु़शबू की उदासी, रहिये दिल के बाग़ में
हर वक़्त दूर होते जाइये नज़दीक मत आईये,
जाते-जाते आप इतना काम तो कीजिए मेरा,
याद का सारा सरो- सामान जलाते जाइये,
रह गयी उम्मीद तो बर्बाद हो जाऊंगा मैं,
जाइये तो फिर मुझे सचमुच भुलाते जाइये,
ज़िन्दग़ी के अंजुमन का बस यही दस्तूर है,
बढ़ के मिलिये और मिल कर दूर होते जाइये,
रिश्ता तो हमारी एक खु़शी और ग़म का था,
मुस्कुराते जाइये पर आंसू मत बहाते जाइये,
आप को जब मुझ से शिकवा ही नहीं कोई तो फिर,
आग ही दिल में लगानी है लगाते जाइये,
आप का मेहमान हूं मैं और आप मेरे मेज़बान
सो मुझे सरबत-ऐ-ज़हर तो पिलाते जाइये,

Bahut badhiya blog
ReplyDelete