यही कहा था ना की मेरे हाथ में है आईना,
तो लो अब मुझपे टूट पड़ा सारा शहर नाबीना,
तूने जो लगाई दिल मे आग वो सूरज के हमशक्ल निकले,
ग़लत थी तू और तेरी बातो का तराना,
हमें भी बिछरने का दुख है
ना कोई बची अब ख्वाहिशे,
सुनो कि भूल चुके हम भी अहदे-पारीना,
उस एक शख़्स की सज-धज ग़ज़ब की थी ऐ "एज़ाज़"
मैं देखता था उसे, और देखता था आईना,

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