अब उसको मुझसे दूर जाने का समय आ रहा था,
मगर सायद उसकी ख्यालो मे मेरी बात चल रहा था,
मोहब्बत दो-क़दम पर थक गई थी
मगर ये यादे कितना चल रहा था,
बहुत ही धीरे धीरे ज़िन्दगी चल रही थी हमारी,
ना जाने मेरे ज़ेहन मे आखिर क्या चल रहा था,
बस इक ही दोस्त थी दुनिया में अपना,
मगर उस से भी झगड़ा चल रहा था,
दिलों को जोड़ने का फ़न आता था हमें,
मगर सायद मेरा काम मंदा चल रहा था,


Comments
Post a Comment
अपने बहुमूल्य विचार हमसे साझा करें। ...