बिल्कुल जैसे तुम हंसती हो...

 


क्या कहा मुझसे बिछड़ के ख़ुश रहती हो, 

यानी मेरी ही तरह तुम भी झूठ बोलती हो, 


मै क्या कहु अपनी यादें इश्क़ तुम्हारी, 

आज सूबह इक टहनी पर चाँद टिका था, 

मैं ये समझा तुम बैठी हो, 


बागो मे उजले-उजले फूल खिले थे, 

बिल्कुल जैसे तुम हँसती हो, 


मुझ को रात बता देती है

पर तुम इस रात मे क्यों ना सो पति हो,


तुम खूद को खूद से लड़ती हो,

बच्ची सी बातें करती हो, 

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