ना नींद और ना ख़्वाबों से आँख भरनी थी...

 


ना नींद और ना ख़्वाबों से आँख भरनी थी, 

कि मिस अंनु, मुझे तुझे जान कर ही प्यार करनी थी, 


किसी दरख़्त की हिद्दत में दिन गुज़ारना था, 

किसी चराग़ की छाँव में रात करनी थी, 


वो फूल और किसी शाख़ पर नहीं खिलना

वो ज़ुल्फ़ सिर्फ़ मिरे हाथ से सँवरनी थी, 


तमाम यादें मुझसे दूर हो जाते, 

मगर तुम से अकेले में बात करनी थी, 


हमारे गाँव का हर आशिक मरने वाला था, 

अब इस गली से वो ख़ुश-बू नहीं गुज़रनी थी, 


तेरे दिल मे मैं अपना दि न कर दू, 

कि ये बात मुझे तुझसे नहीं करनी थी,



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