कभी किसी को सोच से ज्यादा कूछ नहीं मिलता,
कहीं प्यार तो कहीं बेवहार नहीं मिलता,
हर घर मे दुःख, तकलीफ, कलह, स्वार्थ के ही कारण है,
जहाँ उमीद और बिस्वाश हो वहाँ स्वार्थ जैसी बीमारी नहीं मिलता,
कहाँ सर छुपाये कहाँ दिल की बात रखें,
घर तो मिलती हैं लेकिन इंसान नहीं मिलता,
ये क्या अज़ाब है की सब अपने आप में गुम हैं,
ज़बाँ मिली है मगर हम-ज़बाँ नहीं मिलता,
चराग़ जलते ही घर के अंधकार मिट जाते है
मगर ख़ुद की दिलो मे कभी प्रकाश नहीं मिलता,...
अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़

Damn true
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