कल मैंने एक खूबसूरत ख़्वाब देखा,
जो देखा वो कभी भूलूंगा नहीं,
किसी सुनसान जंगल मे एक दिया जला,
फिर इस के बाद क्या हुआ कूछ ज्यादा पता नहीं,
मैं आ रहा था रास्ते में फुल (लड़कियां) थे,
मैं जा रहा था पर कोई रोका नहीं,
फूलो(लड़कियों)की तरफ़ चले तो उम्र कटने लगी,
ये और बात है की रास्ता कटा नहीं,
इस एज़ाज़ की आँखे पूछती रहीं,
कोई पसंद आयी, या नहीं,
मैंने बोला, इन दिनों हूँ ख़ुद से इतना बे-ख़बर,
मैं बुझ चुका हूँ और मुझे पता नहीं,
ये इश्क़ भी अजब कि एक बीमारी है,
मुझे लगा कि हो गया पर हुआ नहीं,



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