कोई मेरे दिल की दुनियां मे चराग रख्खे..



कोई मेरे दिल की दुनियां मे चराग रक्खे,

खुदा जिसको चाहे भिंगोये, जिसे चाहे  प्यासा रक्खे, 


उम्र भर कौन निभाता है ताल्लुक़ इतना,

ऐ मेरी दिल के दुश्मन तुझे अल्लाह सलामत रक्खे, 


मुझको अच्छा नहीं लगता कोई हमनाम तेरा, 

कोई तुझसा हो, तो फिर नाम भी तुझसा रक्खे, 


दिल भी पागल है मेरा की उस लड़की  को याद करे, 

जो किसी और का ना होने दे और ना अपना रक्खे, 


ज़िन्दगी जीने के लिए ये यादें कम नहीं एज़ाज़, 

फ़ख़्र तो इतना है की ये यादें मुझे मुझको संभाल कर रक्खे, 


मज़ाक मत उड़ाव दुनियां वालो मेरा,

ख़ुदा जिसको चाहे तन्हा रक्खे, 


ये मोहब्बत है, इश्क़ है, या चाहत है ’एज़ाज़ ’

हम तो राज़ी हैं खुदा जिस हाल में जैसा रक्खे...





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