ये आलम शौक का देखा न जाये...


 ये आलम शौक़ का देखा न जाये, 

वो प्यार थी या साजिश सोचा न जाये, 


ये किन नज़रों से तुमने उसे देखा था "एज़ाज़"

की उसके बारे मे सोचना, सोचा भी न जाये, 


हमेशा के लिये मुझसे बिछड़ जा

ऐै मेरी यादें, 

वो वफ़ा की बात भुला भी न जाये, 


ग़लत है तू मैंने सुना था,

मगर आज़मा कर तुझे ऐ बेवफ़ा, देखा भी न जाये, 


ये महरूमी नहीं पास-ए-वफ़ा है, मिस अनु, 

की अब कोई तेरे सिवा किसी और से प्यार किया न जाये, 


यही से तो नफरत खिलते है आख़िर, 

की अब किसी का प्यार मुझसे देखा न जाये, 


"एज़ाज़" अपने सिवा है कौन तेरा

तुझे तुझ से जुदा देखा भी न जाये...



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