कहा था किसने की अहदे वफ़ा करो उससे...



कहा था किसने की अहद-ए-वफ़ा करो उससे, 

जो यूँ किया है तो फिर क्यूँ गिला करो उससे, 


ये दोस्ती वाला प्यार की हौसला सही फिर भी

ज़रा फ़साना-ए-दिल इब्तिदा करो उससे, 


ये क्या की तुम ही ग़म-ए-हिज्र के फ़साने कहो, 

कभी तो उसके बहाने सुना करो उससे, 


नसीब फिर कब साथ छोड़ दे, 

जो दिल में हों वही बातें किया करो उससे, 


"एज़ाज़" पुरानी ताल्लुक का ख़ैर क्या होगा, 

यही बहुत है के ज्यादा से ज्यादा बात किया करो उससे,




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