अजीब ख्वाब था मेरा, उसके बदन मे...

 


अजीब ख़्वाब था मेरा, उस के बदन में चमक थी, 

वो इक परी सी लड़की जो मुझे सूबह फ़र्ज़ मे जगाने आई थी, 


बहुत सारे चींज चमक रहा था, पर कूछ नहीं था मेरा, 

वो रौशनी जो जल रही थी वो रौशनी भी पराई थी,


न जाने कितने परिंदो ने इस में शिरकत की थी, 

सायद एक खूबसूरत लड़की की परछाई थी, 

मेरे ख़्वाबों,  आओ मिरे दिल की तरफ देखो,

जहाँ ये रेत है पहले यहाँ कभी तराई थी


अब मैंने अपने दिल पे काटे  लगा दिये है वहाँ, 

जहाँ मैंने तस्वीर तेरी छुपाई थी, 


याद करता था बहुत पहले तुम्हे, 

पर अब तो ख़्वाबों मे भी याद करना मनाही थी,.. 

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