मै एज़ाज़ हूँ उस का दर्द भी हूँ,
ख़ुद ही प्यार ख़ुद ही नफरत भी हूँ,
अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ,
मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ,
प्यार और नफरत के फायदे को देख,
मैं इधर भी हूँ और उधर भी हूँ,
ख़ुद ही मैं ख़ुद को लिख रहा हूँ ख़त,
क्योंकी मैं खूद ही खूद का प्यार भी हूँ,
मेरी दास्ताँ लम्बी बहुत होती है, मगर
खूद से खूद को सुन लू तो खूद का सुकून भी हूँ,


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