याद आया...



जो भी दुख याद न था याद आया, 

क्या बताऊ की आज क्या क्या याद आया, 


आज भी वो मेरे दिल मे हो जैसे,

फिर वहीं चेहर-ऐ-नूर याद आया, 


जिस तरह वोश में लिपटे हुए फूल हो, 

मुझे तेरा एक-इक नक़्श याद आया, 


मगर ऐसी मजबूरी के आलम में कोई

याद आया भी तो क्या याद आया, 


ऐ मेरे यादें 6 साल पहले जा कर देखो,

क्या दिखा और क्या याद आया, 


याद आया था बिछड़ना तेरा, 

फिर नहीं याद कि क्या याद आया, 


जब कोई ज़ख़्म भरा दाग़ बना, 

जब कोई भूल गया याद आया, 

   

ये मुहब्बत भी है क्या रोग "एज़ाज़"

जिसको भूले वो सदा याद आया...



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