बाप की आवाज...



मेरे बच्चे, हम अपनी दुःख में तेरा चर्चा नहीं होने देते,  

तेरी यादों को कभी रुस्वा नहीं होने देते, 


कुछ तो हम ख़ुद भी नहीं चाहते शोहरत अपनी बेटे,  

और कुछ लोग भी ऐसा नहीं होने देते, 


भूख अपने घर की,  मिटाने के लिए 

हम अपनी दिलो में उजाला नहीं होने देते, 


आज भी हम अपनी मेहनत-ऐ-मुश्किल से, 

घर में हम कभी फ़ाक़ा नहीं होने देते, 


अपने हमजोलियों मे ज़िक्र करते हैं पर तेरा नाम नहीं लेते हैं 

क्योंकी हम समुंदर को नदी से तुलना होने नहीं देते, 


मुझको थकने नहीं देता ये ज़रूरतो का पहाड़ 

की मेरे बच्चे मुझे बूढ़ा नहीं होने देते,


अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़... 

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