“एक टूटी हुई आश की फ़रियाद है हम ।
और दुनिया समझती है की आजाद है हम,
नेताओ के बातो मे आ जाते है,
और खुद को बोलते है समझदार है हम,
चन्द पैसो के लिए बेच देते है अपना कीमती वोट,
और बोलते है सरकार गलत, और सही है हम,
अब तो निक्कमे लोग राजनिति मे है
और लोग बोलते है पार्टी हमारा और सरकार है हम,
हमको इस दौर की तारीख ने दिया क्या ‘एज़ाज़'
कल भी बर्बाद थे आज भी बर्बाद है हम ।


Nice
ReplyDeleteAbsolutely
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