अजीब दुनियां है...


अजीब दुनिया है,.... ना काबलियत यहाँ पर सर उठाते हैं

और जो लोग काबिल है वो दुनियां में तकलीफ उठाते हैं, 


अजीब शहर है यहाँ कोई किसी का साथ नहीं देते 

और हमारे गाँव में तकलीफ भी सब मिल कर उठाते हैं, 


इन्हें फ़िरक़ापरस्ती मत सिखा देना ये लोग, 

ये बच्चे है जो मिल कर कटी पतंग उठाते है,


समुन्दर के सफ़र का अलग ही मिजाज है,

इनके लहरे का भी ख़ुदा हाफ़िज़ का तौफा हम उठाते हैं, 


हमारे देश के नौजवान आशिक है  अपने काम का, मगर अपने पेट की ख़ातिर

अपनी काबलियत का हुनर उसे दिखाना था मगर अब अपनी काबलियत का बोझ हर जगह उठाते है,...


अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़ 



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