माँ वो मेरी माँ...



बुलंदी देर तक नहीं किसी शख्श के हिस्से में रहती है, 

बहुत ऊँची इमारत हर घडी खतरे में रहती है, 



ये ऐसा क़र्ज़ है जो मैं अदा कर ही नहीं सकता,

मैं जब तक घर न लौटूं, मेरी माँ मेरे ताक में रहती है, 



जी तो बहुत चाहता है इस कैद-ए-जान से निकल जाएँ हम

मगर मेरी माँ की दुवाओ का असर मेरे साथ हर वक़्त रहती है,



मै तो अपनी दुनियां मे मग्न रहता हूँ,

पर मेरी माँ का आँखे मेरी ख़ुशी की खोज मे रहती है, 



मैं इंसान हूँ बहक जाना मेरी फितरत में शामिल है, 

माँ के दुवाओ के कारण ही, हवा भी मुझे छू के देर तक नशे में रहती है,



मोहब्बत में परखने जांचने से फायदा क्या है

कमी थोड़ी बहुत हर एक के घर में रहती है, 



ये अपने आप को तकसीम (बाँट) कर लेते है जमीनों जयदतो मे, 

खराबी बस यही, हर घर के नक़्शे में रहती है, 

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