भरोसा मत करो अपनी ज़िन्दगी पे साँसों की डोरी टूट जाती है,
घर महफ़ूज़ रहती हैं रिश्ते टूट जाती है,
मुहब्बत भी अजब चींज है पास हो तो झगड़ा,
दूर हो तो सारे गुनाह-ए-बुराई छुट्ट जाती है,
कहीं कोई रिश्ते प्यार को तरसती है,
कहीं प्यार के ज़्यादती से परिवार छूट जाती है,
लड़कपन में किये वादे की क़ीमत कुछ नहीं होती,
अब तो अँगूठी हाथ में रहती है और मँगनी टूट जाती है,
किसी दिन प्यास के बारे में उससे पूछिये जिसकी
कुएँ में बाल्टी रहती है और रस्सी टूट जाती है
कभी एक नर्म रस्सी काट देता है चटानों को
कभी एक मोम सा टुकड़े से छैनी टूट जाती,


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