जरुरी लगा



इतने सालो बाद फिर से लड़कियों से दोस्ती करना ज़रूरी लगा,

अपना भूमिकाएँ बदलना ज़रूरी लगा, 


पुरानी यादो का दर्द,  ढलता रहा आँसुओं में मगर

दर्द को समेट कर नई लड़की पटाना ज़रूरी लगा, 


अपने अच्छे छवि को घर पे ही उतार  कर,

घर से बाहर निकलना ज़रूरी लगा, 


अपने दोस्तों के साथ बात करते हुए, 

पार्क का चक्कर लगाना जरुरी लगा, 


दिखती है बहुत पर मिलती नहीं कोई,  फिर भी, 

फिर भी उम्मीद की भट्टी में जलना ज़रूरी लगा, 


मोमबत्ती से उजियारे की चाह में,

मोम बन कर पिघलना ज़रूरी लगा, 


उसके चक्कर मे पार्क के चक्कर लगा कर मिली नहीं  मंज़िल, 

तो फिर, फिरसे खूद को मानना, समझाना जरुरी लगा...🥺

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