और हम है की खूद को बदनाम कर रहे है...



अपने सब यार काम कर रहे हैं 

और हम हैं कि खूद को बदनाम कर रहे हैं 


यारों के साथ गुनाहो का शौक़ अपनी जगह 

अब तो हम गुनाहे सरेआम कर रहे हैं 


बाहर लोगो के बीच मे हमारी चर्चा है बहुत,

लोग क्या जाने, हम तो ख़ुद से खूद मे सुधार कर रहे हैं,


हम हैं गुनाहो मे मसरूफ़ मगर 

ना जाने क्या खूद मे सुधार कर रहे हैं,


है हमारी वो बेहायाई  का हाल कि

खूद को तारास्ते हुवे भी खूद को नजर अंदाज कर रहे है,


एक प्यारी सी लड़की चाहिए हमको भी 

हम ये एलान लोगो मे आम कर रहे हैं,,,

अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़...

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