“ तेरे बारे में जब सोचा नहीं था,
मै तन्हा था मगर इतना नहीं था,
तेरी तस्वीर से करता था बातें,
मेरे कमरें में आइना नहीं था,
मेरी चाहत ने मुझे प्यासा ही रखा,
मै जब अकेला था तो प्यासा नहीं था,
मनाने रूठने के खेल में हम,
बिछड़ जायेंगे मैंने ये सोचा नहीं था,
अपने फायदे के लिए मेरे हुनर को,
इस्तमाल करती थी मुझे मालुम नहीं था,
दूसरे के संघ जाने के लिए मेरा सहारा लिया
ये बात मुझे पता नहीं था,

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