सुनी नहीं सरकार कोई अर्जी अब तक



मेरी आँखों को चारो ओर  हवसी,

लालची दुनियां दिखाई देता है!


जब मै लोगो से मिलता हूँ,

लालच,मक्कारी,फरेबी सा दिखाई देता है!


करते रहते है  हर लोग एक दूसरे की बुराई,

चारों तरफ कमीनो का पहरा दिखाई देता है!


कब तक झेलोगे ये जुर्म लोगो सड़कों पे बैठकर

शासन मुझे यहाँ का तो बहरा दिखाई देता है!


सुनी नहीं सरकार कोई अर्जी अब तक, 

फसलों पे अब किसानों को ख़तरा दिखाई देता है!


सींचा था जिस जमीं को शहीदों ने अपनी लहू से,

कुछ लोगो की वजह से वो सूखा  दिखाई देता है!


अल्फाज़-ऐ-एजाज 

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