जूनून-ए-रफ़्तार..

 हर वक़्त जूनून-ऐ-रफ़्तार में रहने के लिए,

एज़ाज़, कुछ हुनर चाहिए बाजार में रहने के लिए



ऐसे मजबूरी नहीं है कि झूठ ही बोलू  मै,

खुद को परखता हूं रफ्तार में रहने के लिए



मैंने देखा है जो सानो शौकत मे रहते है,

मजबूर हो गए जॉब में रहने के लिए,



अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग

नंगे हो जाते हैं अखबार में रहने के लिए,,,

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