दिल-ऐ-थकन -2



चर्चा थी दोनों की, दोनों से दिल लगाया मैं,

किसे फ़रेब दिया, किस से फ़रेब खाया  मैं!


वफ़ा तो मिली ही नहीं पर दिल तो अपना है,

शहर वाली तो कामिनी थी ही पर गाँव वाली के चक्कर मे सिमट कर रह गया मै!


यही वो महीने थे, एक को सेटिंग करवाया उसके बॉय फ्रेंड के साथ,

सोचा गांव वाली से अब दिल लगाऊं मै!


पर ऐसा कुछ हुआ नहीं जो सोचा वो मिली नहीं,

वो भी किसी के चक्कर मे, अब मै करता तो क्या करता मै!


बिछड़ के उससे फ़ौरन दुवा किया, ऐेे मौला 

कभी किसी की मुहब्बत न आज़माऊँ मैं!


हर एक लम्हा नयापन हमारी फ़ितरत थी,

कहो तो अपनी ज़िन्दगी की और भी पुरानी ग़ज़ल सुनाऊँ मैं,...

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