आप क्या जाने लोग मुझे क्यों बुरा कहते हैं
आप कहते है जो मुझे अच्छा सायद गलत कहते है,
वाकई आप जानते हो मेरे अल्फाज़ो को लोग क्या कहते हैं
छोड़ो बस इतना जानो,
ना कुछ अच्छा कहते हैं ना कुछ बुरा कहते हैं,
इंसानों मे करते है इंसान नई खुदा की तलाश,
हम तो इन्सान को दुनिया का बोझ कहते हैं,
हर शख्स की सूरत नजर आती है उसके सूरत से अलग,
इंसानों मे खुदा देखने वाले बे-इल्म लोगो को हम बेवकूफ़ कहते हैं,
अपनी दिल की बात करें भी तो करें किस दिल से,
हम खुद अपने को भी अपने से जुदा कहते हैं,
मेरी उदासी का बयान करना है नामुमकिन,
अब तो हर बात को हम अच्छा ना बुरा कहते है,
औरों का तजुरबा जो कुछ हो मगर हम तो ज़िन्दगी मे ,
गलतियों के बगैर मौज मस्ती को जीने का मजा कहते हैं,

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