आदमी का ज़हन यूँ पुरनूर होना चाहिए

नेकियों की पैरवी भरपूर होना  चाहिए


रौनक़े जन्नत की घर में आपके आ जायेंगी

बात हर माँ बाप की मंज़ूर होना  चाहिए 


दुनिया भर के तंज़ सब हो जायेंगे ख़ुद बेअसर

प्यार के नश्शे में हम को चूर होना चाहिए


जब भी मिलते हैं तो मिलते हैं बड़ी मुश्किल से हम

अब तुम्हारी माँग में सिंदूर होना चाहिए


इस तरह शामिल हो मेरी ज़िन्दगी में तुम सनम

दर्दो-ग़म का सिलसिला काफूर होना चाहिए


प्यार के शैदाई जब मिलते हैं आपस में गले 

जो भी हो दस्तूर वो दस्तूर होना चाहिए


घोलते रहते फ़ज़ाओं में ज़हर जो रात दिन

उनके मंसूबों को चकनाचूर होना चाहिए


ख़्वाहिशों की मंडियों में बेच दे अपना ज़मीर

आदमी इतना नहीं मजबूर होना चाहिए


आपका दीवाना *एज़ाज़* आपकी महफ़िल में है 

आपको इस बात से मसरूर होना चाहिऐ

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