नूर का हिस्सा हो कोई या सरापा नूर हो।

आप हंसते हो तो लगता है कि जैसे हूर हो।।


क्या रहें रस्में जहां की और क्या दस्तूर हो।

मैं नशे में चूर हूं वो भी नशे में चूर हो।।


इक तो ये क़ातिल जवानी उस पे ये बरसात भी।

और ऐसे में ख़ुदारा आप हम से दूर हो।।


दिल से हो रिस्ता दिलों का दो बदन इक जान हों।

एक पल की भी जुदाई फ़िर किसे मंजूर हो।।


दिल के गुलशन में खिली है जब से इक ताजा कली।

सब मुझे फीके लगें हैं अत्र या काफूर हो।।


हंसते-हंसते सह रहा हूं इसलिए हर इक सितम।

भर ही जाता है यकीनन ज़ख़्म या नासूर हो।।


नूर तुमको नूर बोले और आबिद आबिदा।

रिन्द ये कहते हैं कि तुम दुख़्तरे-अंगूर हो।‌

Comments