जज्बात से भी वो, अब काम नहीं लेते,
वो दुआ में अब, हमारा नाम नहीं लेते।
ज्यादा नहीं होता, यह दिल का दर्द तो
हाथों में हम कभी भी, जाम नहीं लेते।
जो मालूम ये होता, वो निकलेंगे बेवफा,
हरगिज कभी उनका, सलाम नहीं लेते।
इश्क में तो अकेले, जिया नहीं जाता,
क्यों आकर मेरा हाथ, थाम नहीं लेते।
बेदाग सी रहती, ये पूरी जिंदगी मेरी,
जो इश्क का हम, इल्जाम नहीं लेते।
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