जिंदगी हमारी हम शान से बिताएँगे।
सामने किसी के ये सर नहीं झुकाएँगे।
झूठी बातें कर कर के खूब बरगलाया है।
मतलबी कभी उन को सच नहीं बताएँगे।
भर गया है काँटों से खूब ये चमन सारा ।
हम इन्हें हटा कर के फूल कुछ खिलाएँगे।
रहनुमा बना जिन को आप साथ में लाए।
मिल के डाकुओं से वे काफिला लुटाएँगे।
दोस्त जो हमारे थे बन गए हैं वो दुश्मन।
भूल कर सभी अहसां दुश्मनी निभाएँगे।
सुख दिए जिन्हें हमने सारे ही जमाने के।
दुख हमें वे देकर के खूब मुस्कुराएँगे।
जख्म जो दिए एज़ाज़ आपने बड़े हँस कर।
फूलों की तरह से वो दिल में हम सजाएँगे।
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