वो मिरे पास है क्या पास बुलाऊँ उस को
दिल में रहता है कहाँ ढूँडने जाऊँ उस को
चलना चाहे तो रखे पाँव मिरे सीने पर
बैठना चाहे तो आँखों पे बिठाऊँ उस को
वो मुझे इतना सुबुक इतना सुबुक लगता है
कभी गिर जाए तो पलकों से उठाऊँ उस को
मुझे मालूम है आख़िर को जुदा होना है
लेकिन इक बार तो सीने से लगाऊँ उस को
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