आ गई जब ये जान मुश्किल में।

खोली है तब जुबान मुश्किल में।


दर्द कैसे कहाँ पे होता है।

मिल न पाए निशान मुश्किल में।


खत्म सम्मान हो गया उनका।

रह गई फीकी शान मुश्किल में।


मन की बातें समझ नहीं पाए।

खुल न पाई गठान मुश्किल में।


सच ने अपना असर जो दिखलाया।

झूठ की है दुकान मुश्किल में।


उलझनें सबकी एक जैसी हैं।

सारा ही है जहान मुश्किल में ।


सीमा पर सर्द बर्फ है एज़ाज़ ।

ड्युटी करता जवान मुश्किल में।

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