जातिवाद की रोटी सेकी,

भारत के हर घरों के चूल्हों में...!


रो रहा है हमारा भारत,

जातिवाद के अंधियारे में...!


वोट की बुनियाद भी रखी,

जातिवाद की घेरो मे...!!


जाति इसकी जाति उसकी,

अब मोहब्बत नहीं किसी के दिलो मे...!


बढ़ता ही जा रहा है भेद-भाव

दो दोस्तों के दरमियानों मे...!


राष्ट्रीय भावना की सोच नहीं,

कैसे लहरेगा अपना झंडा विश्व हर चौराहो पे...!





अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़

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