बैठ जाते हैं जमीन पर अक्सर वो थक हार कर
कि जिंदगी जीनी पड़ती है जिनको मन मार कर
कभी कोई ख्वाहिश तो कभी कोई फरमाइश
गरीब पिता घर जाता है बच्चों से नजरें बचा बचा कर
पीछे न रह जाए लोगों से कभी किसी भी क्षेत्र में
बच्चों की खातिर बेच देती है माँ बदन से गहने उतार कर
पाल नही पाते माँ-बाप को 4 बेटे मिलकर भी
माँ करती है जिन बच्चों का पालन उम्मीद पालकर
कि पलकों पर कभी जिनको बिठाकर रखते हैं माँ-बाप
उन्ही आँखों मे आँसू लाती हैं बेटियाँ किसी के साथ भागकर
फेर लेती हैं औलादें कैसे उन माँ-बाप से
जिन को पालते हैं माँ-बाप अपने पेट काट कर
नही मिलती जगह उनको नरक में भी मरकर
जो करते हैं माँ-बाप से बातें ऊंची आवाज कर
न दुखाओ दिल इनका जीवन में मेरे यारो
पूजा करो माँ-बाप की भगवान जानकर😊
अल्फ़ाज़-ए-एज़ाज़
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