ख़ुल के आऐ थे क्यों__हया समझूं।
जख़्म को किस तरहा_दवा समझूं।।
दिल ये कहता है__,, बवफा समझूं।
दिमाग़ केहता है_,,__बेवफा समझूं।।
तेरी रग-रग में भरा है__,,_लालच।
मुझको बतला में__,तुझको क्या समझूं।।
तेरे दिल का कोई__ठिकाना नही।
तेरे दिल को क्यों__आशना समझूं।।
पहुच जाऊगां__,,अपनी मंजिल तक।
ठीक से ग़र मैं____,,रास्ता समझूं।।
ज़ुल्म साबित जब हो गया "एज़ाज़ "।
किस लिऐं तुझको__,,बेगुनाह समझूं।।
Comments
Post a Comment
अपने बहुमूल्य विचार हमसे साझा करें। ...