आँखों में आँसुओं को छिपाना पड़ा मुझे।

किस्से हजार झूठ सुनाना पड़ा मुझे।


अपने गमों को भूल के ढाढस उसे बँधा।

 झूठी बना के बात हँसाना पड़ा मुझे।


उम्मीद मेरे दिल में जगाई जो आपने।

फिर से हसीन ख्वाब सजाना पड़ा मुझे।


उस बेवफा ने तोड़ के दिल मेरा रख दिया।

अरमान आँसुओं में बहाना पड़ा मुझे।


मतलब भरे थे लोग शराफत से दूर सब।

ईमान उन के बीच बचाना पड़ा मुझे।


कोई नहीं था साथ कठिन राह थी बहुत।

तन्हा ही हौसले को जुटाना पड़ा मुझे।


यकीन उसको दिलाऊँ मैं किस तरह।

अपनी ही जाँ का दाँव लगाना  पड़ा मुझे।

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