नफरत को दिल में पाल के रहने नहीं दिया।
आपस के प्रेम भाव को मरने नहीं दिया।
ईमान से गुजार दी हमने ये जिंदगी।
इसको किसी भी हाल में डिगने नहीं दिया।
विश्वास तोड़ना नहीं मंजूर था हमें।
धोखा फरेब झूठ को चलने नहीं दिया।
दुख दर्द को छिपाए रखा दिल में इस तरह।
आँखों से आँसुओं को भी बहने नहीं दिया।
आँधी ने चल के पेड़ गिराए बड़े भले।
हमने चराग एक भी बुझने नहीं दिया।
नेकी की राह पर चले मजबूत रख कदम।
सच ने जरा भी झूठ से डरने नहीं दिया।
"एज़ाज़' जिसे दिए थे जमाने के सुख सभी।
उसने हमारे जख्म को भरने नहीं दिया।
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