अतीत की किताब खोली तो हर
पन्ने पर नाम तेरा था
किसी पे हमारे खूबसूरत पलो
का ज़िक्र था......
तो किसी पे बिछुङने का गम था
माना कि धूल बङी जम चुकी है,किताब पर
फिर भी उसमे लिखा हर किस्सा मुझे याद था
कुछ मे हमारे पास आने का ज़िक्र था
तो कुछ ने किया हमे बदनाम था
हर किताब के हर शब्द मे दिखता तेरा अक्स था
इसके हर किस्से से जुङी तेरी याद थी
मिलने का जब भी दिल करता मेरा तुझसे
ये ले जाती मुझे तेरे पास थी
मेरे अतीत की दुनिया सिर्फ हमारी थी
उसकी किताब मे क़ैद हम दोनों की जवानी थी
जिसमे तू थी,मैं था,और एक अधूरे प्यार की
कहानी थी........
----एज़ाज़----
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