मेरी सबसे बड़ी भूल

मेरी सबसे बड़ी भूल



ऐसा नहीं था की पहले 
कभी मिले नहीं थे हम, 
ऐसा नहीं था की पहले 
कभी मिले नहीं थे हम, 
हाँ , एक दूजे की  
आँखों मे खोए नहीं थे हम, 

मिलते तो रोजाना ही क्लास में थे, 
पर पानी और नोटबुक लेने देने से 
आगे बढे नहीं थे हम, 
ऐसा नहीं था की पहले 
कभी मिले नहीं थे हम, 

बातें हमारी कुछ इस 
कदर शुरू हुई थीं ,
मुझे भी गाना सीखा दे यार, 
से आगे बढ़ी थी,

हाँ, मैंने तुम्हे मेरी ओर देखते हुए 
कई दफा देखा था, 
तुम्हारी आँखों मे छुपे मेरे लिए
प्यार को भी मैंने परखा था

एक दफा उदास थी तुम, 
मेरे आने से मुस्कुराये थे, 
क्या सोचती हो, हम 
ये सब नहीं जान पाए थे,

जब पहली बार मुझे, 
मिलने को बुलाया था , 
हो गया था मेरा बुरा हाल, 
और इस बेकरार दिल का 
ना कोई ठिकाना था 

वो रात तो ...... बोलूंगा क्या 
ये सोचते सोचते बीत गया था, 
सूबह मैं उठा तो पहनूँ क्या 
इसी उलझन मे उलझ गया था, 

तुम्हें  जो भी पसंद है 
वो याद था मुझे, 
मैंने वो सब एक ही दिन में 
पूरी करने की कोशिश किया था, 

पहली सी ये मुलकात 
हमारी मुक्कमल हो,
 इसलिए छोड़ा नहीं 
कोई कमी था, 

परफ्यूम मार कर कमीज में,
मै अपने मंजिल की 
ओर निकल पड़ा था, 

मेरी माँ ने रोक कर 
जाने की वजह पूछी, 
और कहा, बेटा कल से 
तू बड़ा खुश दिख रहा था, 

मै अपने ज़ज़्बात 
छुपा नहीं पा रहा था, 
खुशी इतनी हो रही थी 
की चेहरे से झलक रही था,

क्या-क्या बोलूंगा मैं 
सब सोच कर बैठा था, 
अगर तूने नहीं कहा ना, 
तो मैं हीं कह दूंगा, 
मैं ये भी तय कर बैठा था, 

तुझे दूर से देख के हीं  
मै खुश हो गया था, 
रात से जो रट रखा था 
वो सारी बात जो बोलना था  
ना जाने मेरे ज़ेहन से 
वो कहाँ खो गया था, 

तू कॉलेज के बाहर खड़ी सड़क पर, 
मुझे देख-देख मुस्कुरा रही थी 
पागल मुझे इश्क़ में 
तू और बना रही थी, 

तुझपे वो काला पटियाला 
जँच बहुत रहा था,
और मैं धीरे धीरे 
तेरी ओर बढ़ रहा था, 

तुमसे बात अच्छे से हो इसलिए,
तुम्हें और तुम्हारी सहेली को 
होटल ले कर आया था, 

कुछ खाने पीने के बाद 
तुम कुछ कहने को घबराई थी 
मेरे कानों में कौन सा शब्द जायेगा 
ये सोच-सोच कर मैं मुस्कुराया था, 

पर तुम कुछ बोल ना पायी थी, 
मै भी बुद्धू सा था, कुछ ना कह पाया था, 

क्या तुम्हें याद है वो दिन, 
जब एक लड़के ने तुम्हें सताया था,
मैंने सब के सामने तुम्हें  
" I Love You " बोल कर 
उसे सबक सिखाया था, 

मैं भी नादान था तुम्हारे जज़्बात को 
समझ ना पाया था, 
मेरे लिए घर पे डांट सुनती तुम, 
ये सुन-सुन कर अपने आप को 
मैंने खूब हँसाया था,

पता नहीं क्यों क्या मुझे हो गया था, 
मैं तुम्हारे और अपने बीच के 
प्यार को समझ ना पाया था, 

और तुम मुझे प्यार करती हो,
ये बात दोस्तों को बता कर 
तुम्हारा मज़ाक उड़ाया था,

मुझे माफ़ कर देना मेरी जां , 
मैंने तुम्हें बहुत सताया था, 
हाँ, मुझे माफ़ कर देना मेरी जां
मैंने तुम्हे बहुत सताया था, 

@ दिल की आवाज़, अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़ @


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