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तबाह-ऐ-ज़िन्दगी....🎂🎂🎂

🎂 गुजरते लम्हे ज़िन्दगी के 🎂

हम खुद ही हुए तबाह वरना...

वो यहाँ नहीं है मगर वो यही पे है...

हम तेरी चाह में वहाँ तक पहुँचे...

साथ रोती थी मेरे साथ हंसा करती थी...

हम फ़रिश्ते नहीं की हम गुनाह नहीं कर पाए...

दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाले...

मेरे दिल के अब तो ये हाल है जैसे...

शायद...

अब जमाना नहीं की तुमसे कहें...

थक गया है मुसलसल सफर उदासी का

दिल का बहलना

अब वो कैसी होगी...

मैं अब कैसा लगता हूँ

दिल-ऐ-थकन

घर परिवार और समाज...

लड़कियों की बात

मै क्यों...? उसका हो ना पाया

खुदा की अमानत हैँ बेटियाँ