सबसे करीब मेरे रब

सबसे करीब मेरे रब
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वो मेरे साथी नहीं हैं, 
पर वो हर वक़्त साथ हैं मेरे,
मैं क्या बताऊँ कितने करीब हैं मेरे,

मेरी सोच भी उनको सुनाई देता है,
हर वो गलत बात हमारी जानता है, 
फिर भी कितना हमसे प्यार करता है,

उन्हीं ने ही आँख आता की है 
मुझे देखने के लिए, 
पर उन्हीं को छोड़ कर 
मुझे सब दिखाई देता है, 

मैं अपने लिए, सिर्फ अपने लिए 
उनकी बात नहीं मान पाता हूँ 
और घाटे में चला जाता हूँ, 

नफ़्स मेरे बहुत करीब हैं मुझसे, 
फिर भी मै रो कर अपनी 
हर जिद्द मनवा लेता हूँ,

शुक्र है की कोई चादर मेरे पास नहीं है, 
जितनी मर्जी पाँव फैला लेता हूँ 

मै हर बार गम में डूब जाता हूँ, 
पर वो मेरे हर गम संभाल लेता हैं,

और इसी बात की खुशी का एहसास, 
मेरा जीना आसान कर देता है.... 

अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़ 

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