प्यारी बेटियाँ
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हर एक आवाज़ लड़कियों को पराई बताती है,
और बहनें अपने घर की शहजादी बताती हैं,
कई बातें मोहब्बत सब को बुनियादी बताती है,
जो दादी बताती थीं वो बहने बताती हैं,
जहाँ घरों मे चिंता की बातें आती हैं,
वहाँ ये बेटियां चिंता को बेवकूफी बताती हैं,
ये बहने हैं साहिब भाई के
हर बोल को घोंट लेती हैं
अपनी तकलीफ को छुपा कर
सुखद सुखदाई बताती हैं,
बहनों की पाक रिश्तों को
अब भाई कहाँ समझ पाते हैं
खूद को घर के ताज़ और
बहनो को घर का बोझ बताते हैं,
थकन को ओढ़ कर बिस्तर पे
जा कर लेट जाती हैं
कुछ घर के नमूने उसे काम चोर बताते हैं
अपनी ख्वाहिशों को दबा कर बेटियाँ
हर बात पे खुश होती हैं
पर ये दुनिया बेटियों की
ख़ुशी को कोई राज बताते हैं,
और ये बिना दुपट्टा ओढ़े
जब बेटियां घर से निकलती हैं
कुछ समाज के ज़ईफ कुत्ते बिगड़ैल बताते हैं
इनकी आँखों मे जरा सा भी हया नहीं होता,
और बेटियों को पर्दा में रहना चाहिए सब को बताते हैं
लोगो का अपना ठीक नहीं
और बेटियों पे उंगली उठाते हैं
घर मे प्यार नहीं देते इन्हे, अगर बाहर ढूंढ़ ले,
तो बेटियों को घर की बर्बादी बताते हैं।
अल्फाज़-ऐ-एज़ाज़

Bhut khub
ReplyDeleteMashallah bht acha h 😊
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